जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: व्यापार

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

ब्रीस्टल मायर्स स्क्विब की कैंसर दवा इकाई को विश्व आर्थिक मंच ने नवाचार पुरस्कार दिया, अमेरिकी कारखानों में एआई अपनाना अभी पच्ची पर

विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने इस वर्ष केवल एक ही अमेरिकी निर्माता को नवाचार वर्गीकरण में सम्मिलित किया – ब्रिस्टोल मायर्स स्क्विब (BMS) का वह उत्पादन कारखाना जो कैंसर‑दवाओं का निर्माण करता है। यह उपलब्धि भारतीय निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए दोधारी तलवार सिद्ध हो सकती है: जहाँ एक ओर हाई‑टेक फार्मा सेक्टर में एआई के उपयोग से उत्पादन‑क्षमता, लागत‑प्रभावशीलता और समय‑से‑बाजार लाभ में स्पष्ट बढ़ोतरी दिखती है, वहीं व्यापक अमेरिकी उद्योग में समान तकनीकी बदलाव अभी भी धीमी गति से हो रहे हैं।

अमेरिकी कारखानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अपनाने की गति को लेकर कई अध्ययन बताते हैं कि 2025 तक औद्योगिक उत्पादन में एआई की संभावित योगदान 15‑20 % तक पहुंच सकती है, परन्तु वर्तमान में औसत अपनाने का स्तर 5‑7 % ही है। इस पीछे रहने के मूल कारणों में पूँजी की सीमित उपलब्धता, कुशल तकनीशियन की कमी, और नियम‑पर्यावरण की जटिलता प्रमुख हैं। इन बाधाओं को पार करने के लिए सरकार ने “मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन फंड” तथा “टेक्नोलॉजी रिन्यूअल टैक्स क्रेडिट” जैसे प्रोत्साहन पैकेज लॉन्च किए, परन्तु कंपनियों की निवेश प्राथमिकताएँ अभी भी पारम्परिक मशीनरी और श्रम‑भारी प्रक्रियाओं की ओर झुकी हुई हैं।

फार्मास्युटिकल सेक्टर इस असामान्य प्रवृत्ति से अलग दिखता है। BMS ने एआई‑आधारित प्रक्रिया अनुकूलन, पूर्वानुमानित रखरखाव और क्वालिटी कंट्रोल के लिए उन्नत एल्गोरिदम लागू किए हैं। इन तकनीकों ने उत्पादन में औसत 12 % की लागत‑बचत, 9 % की प्रक्रिया‑समय कमी और दोष‑दर में 30 % तक की गिरावट दर्ज कराई है। इसके अतिरिक्त, एआई‑सहायता से चलने वाले डेटा‑ड्रिवन रिसर्च ने नए एंटी‑ट्यूमर कॉम्पाउंड्स के विकास चक्र को घटाकर औषधि बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान किया है।

आर्थिक प्रभाव की बात करें तो, इस प्रकार के उच्च‑तकनीकी प्लांट न केवल सीधे तौर पर 1,200 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में रॉ मटेरियल सप्लायर्स, लॉजिस्टिक्स एवं वैक्यूम‑पैकेजिंग कंपनियों को भी अतिरिक्त मांग प्रदान करते हैं। इस वृद्धि से निर्यात‑उन्मुख औषधियों के मूल्य में इस वर्ष पहले आधे में 6 % की निर्यात‑वृद्धि देखी गई, जो भारत के फार्मा निर्यात के प्रति प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का एक प्रतिकूल संकेत है।

जागरूकता के साथ यह भी कहा जाना चाहिए कि एआई के व्यापक अपनाने पर नियामकीय फ्रेमवर्क अभी तैयार नहीं है। FDA ने हाल ही में एआई‑आधारित उत्पादन प्रोटोकॉल के लिए “Good Machine Learning Practice” (GMLP) दिशानिर्देश जारी किए हैं, परन्तु इन नियमों की व्यावहारिक कार्यान्वयन में उद्योग के बीच विसंगति बनी हुई है। इस संबंध में नियामकीय अनिश्चितता छोटे और मध्यम आकार की फार्मा कंपनियों के लिए एक संभावित जोखिम कारक बनकर उभरा है।

वैश्विक स्तर पर देखे जाने वाले एआई‑ड्रिवेन उत्पादन का उत्साह भारत में भी नीति स्तर पर परिलक्षित हो रहा है। भारत सरकार ने “मेका इंडिया 4.0” पहल के तहत एआई‑सक्षम मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों के लिए 25 % तक की टैक्‍स छूट की घोषणा की है। परन्तु अमेरिकी उद्योग की फिकिरें और BMS जैसे ही विशिष्ट सफलताओं को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि सिर्फ प्रोत्साहन ही पर्याप्त नहीं; तकनीकी कौशल, डेटा‑इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्पष्ट नियामकीय मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

संक्षेप में, ब्रिस्टोल मायर्स स्क्विब की नवाचार मान्यता अमेरिकी उद्योग में एआई अपनाने की असमानता को उजागर करती है। जबकि हाई‑मार्जिन फार्मा सेक्टर ने तकनीकी परिवर्तन को तेज़ किया है, अधिकांश मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में पूँजी‑अभिवृद्धि, कौशल‑कमी और नियामकीय अनिश्चितता जैसी बाधाएँ अभी भी मौजूद हैं। नीति निर्माताओं के लिए चुनौती यह है कि इन बाधाओं को दूर कर एक व्यापक, प्रतिस्पर्धी और एआई‑धारित औद्योगिक परिदृश्य तैयार किया जाए, जिससे न केवल उत्पादन‑क्षमता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए स्वरूप और उपभोक्ता‑हित में भी वास्तविक सुधार संभव होगा।

Published: May 7, 2026