जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: व्यापार

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

तीसरे निरन्तर दिन सोने की कीमत में हल्की बढ़ोतरी, यू.एस.-ईरान शांति समझौते की संभावना पर बाजारों में न्यूनतम झटका

दुनिया के प्रमुख सुन्‍दर सरोकारियों ने बुधवार को नोट किया कि सोने की कीमत तीसरे दिन लगातार छोटे‑छोटे लाभ पर बंद हुई। यह परिवर्तन मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यू.एस. और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से प्रेरित माना जा रहा है, जिससे जियोपॉलिटिकल जोखिमों में कमी का अनुमान लगाया गया।

भारतीय बाजार में भी इस हल्की बढ़ोतरी को महसूस किया गया। मुंबई के प्रमुख एक्सचेंजों पर 24‑घंटे में सोने की कीमत लगभग 0.3 % बढ़कर रु 5,350 प्रतिशत ग्राम के स्तर पर पहुंची। मौजूदा स्तर पर सोने का दाम अभी भी आयात‑निर्भर भारत में महंगाई के दबाव को बढ़ा रहा है, विशेषकर उन मध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के लिए जो निवेश एवं उपहार‑उपभोग दोनों के लिए सोने पर निर्भर हैं।

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने अभी तक इस मूल्य उतार‑चढ़ाव पर कोई मौद्रिक नीति परिवर्तन नहीं किया है, परन्तु मौजूदा आयात शूल्‍क संरचना और निर्यात‑केंद्रित नीति में संभावित बदलाव की चर्चा तेज़ हो रही है। सोने पर 10 % के आयात शूल्‍क को कम करने के प्रस्तावों को कई उद्योग विशेषज्ञ आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा आरक्षित को सुरक्षित रखने के बीच संतुलन के रूप में देख रहे हैं।

नीति‑निर्माताओं को इस स्थिति में सावधानी बरतनी चाहिए। शांति समझौते की खबरें अल्पकालिक राहत प्रदान कर सकती हैं, परन्तु वास्तविक लाभ तब ही स्पष्ट होगा जब ऐसी कूटनीतिक प्रगति सतत् आर्थिक सुरक्षा में परिवर्तित हो। इस बीच, भारतीय उपभोक्ता सदैव अस्थिर अंतरराष्ट्रीय धातु बाजार के शिकार होते रहे हैं; इसलिए, दीर्घकालिक निर्यात‑उत्पादकता और वैकल्पिक निवेश साधनों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है।

अंततः, सोने की कीमत में इस चरणिक बढ़ोतरी को वैकल्पिक जोखिम‑सेटिंग के रूप में देखना चाहिए, न कि स्थायी आर्थिक सुधार के संकेत के रूप में। बाजार प्रतिभागियों को विश्व‑राजनीतिक परिदृश्य की अस्थिरताओं के प्रति सतर्क रहना चाहिए तथा RBI को मौद्रिक नीति में लचीलापन बनाये रखने के साथ ही आयात‑शूल्‍क के प्रभाव को लगातार समीक्षात्मक दृष्टि से देखना चाहिए।

Published: May 8, 2026