डिज़्नी‑20थ सेंट्र बाई Studios की ‘द डेविल वेयर्स प्रादा 2’ ने ग्रीष्मकालीन बॉक्स‑ऑफ़ में 77 करोड़ की कमाई की
बॉलीवुड और हॉलीवूड के मिश्रित प्रोजेक्ट ‘द डेविल वेयर्स प्रादा 2’ ने 4 मई को रिलीज़ होते ही भारतीय बाजार में 77 करोड़ रुपए की शुरुआती टिकिट बिक्री दर्ज की। यह आंकड़ा न केवल ग्रीष्मकालीन फिल्म‑सत्र के लिए सबसे बड़ी ओपनिंग बन गया, बल्कि बहु‑राष्ट्रीय मनोरंजन दिग्गज डिज़्नी‑20थ सेंट्र बाई Studios के वित्तीय प्रदर्शन पर भी सकारात्मक असर डालता है।
डिज़्नी की तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, इस फिल्म से प्राप्त शुद्ध आय कंपनी के वैश्विक बॉक्स‑ऑफ़ रेवेन्यू में लगभग 4% का इज़ाफ़ा करेगी। भारत में 3,500 से अधिक स्क्रीन पर प्रदर्शित होने के कारण, मल्टीप्लेक्स चेन जैसे PVR, INOX और Carnival में टिकट बिक्री में उल्लेखनीय उछाल आया, जिससे इनकी औसत दैनिक टर्नओवर में 12-15% वृद्धि हुई। इस वृद्धि से इन कंपनियों के शेयर मूल्यों में हल्की गिरावट के बाद समर्थन मिल रहा है।
फिल्म के सफल ओपनिंग से जुड़े आर्थिक प्रभाव के कई आयाम हैं। सबसे पहले, इसने सीधे-सीधे कर राजस्व में इज़ाफ़ा किया; मध्यप्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख बाजारों में GST एवं सिनेमा एंटरटेनमेंट टैक्स से लगभग 6 करोड़ रुपये अतिरिक्त पूँजी सरकार के पास पहुँचा। इसके अतिरिक्त, फिल्म के प्रचार‑प्रसार कार्य में विज्ञापन एजेंसियों, प्रिंट मीडिया और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को मिलने वाले अनुबंधों ने विज्ञापन खर्च में 9% की बढ़ोतरी की, जिससे एजीएम और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियों के आय में सीधे लाभ हुआ।
रोज़गार के संदर्भ में, बड़े पैमाने पर रिलीज़ के कारण थिएटर प्रबंधन, कस्टमर सर्विस, सुरक्षा और खाद्य‑पेय स्टॉल कर्मियों की अस्थायी नौकरियों में 2,000 से अधिक अतिरिक्त रोजगार उत्पन्न हुए। जबकि यह रोजगार मौसमी है, छोटे‑मोटे व्यवसायों जैसे कंसर्ट, मर्चेंडाइज़िंग और स्थानीय टूर ऑपरेटरों के लिए भी हल्की बढ़ोतरी का संकेत देता है।
नियामकीय परिप्रेक्ष्य में, भारतीय सर्क्युलर इकॉनॉमी (ECE) नीति की छत्रछाया में फिल्म‑उत्पादनों को आवंटित डिपेंडेंट टॅक्स शिल्पवर्गीय छूट का लाभ मिला है, जिससे निर्माण और पोस्ट‑प्रोडक्शन लागत पर 5-7% की बचत संभव हुई। हालांकि, आलोचक इस बात को लेकर चेतावनी देते हैं कि इस प्रकार की कर छूट श्रेणी‑भेद को बढ़ावा देती है और छोटे‑मोटे निर्माताओं के लिए असमान प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाती है।
उपभोक्ता पक्ष से देखा जाये तो 77 करोड़ रुपये की ओपनिंग से यह स्पष्ट होता है कि शहरी मध्यम वर्ग अभी भी बड़े बजट की हॉल‑विचर अनुभव को प्राथमिकता देता है। किंतु OTT प्लेटफ़ॉर्म की तीव्र प्रतिस्पर्धा के मद्देनज़र, यह प्रश्न उठता है कि क्या इस तरह की बड़े बजट की फ़िल्में भविष्य में भी समान दर्शक संख्या आकर्षित कर पाएँगी, या फिर डिजिटल सब्सक्रिप्शन मॉडल के आकर्षण से सिनेमाघरों की आवक में गिरावट आएगी।
सारांश में, ‘द डेविल वेयर्स प्रादा 2’ ने बॉक्स‑ऑफ़ में जबरदस्त शुरुआती कमाई कर भारतीय मनोरंजन उद्योग में आर्थिक गतिशीलता को उजागर किया है। लेकिन दीर्घकालिक स्थिरता के लिए कर नीति में समानता, डिजिटल‑ऑफ़लाइन संतुलन और उपभोक्ता संरक्षण पर ध्यान देना अनिवार्य है, ताकि इस प्रकार की हिट फ़िल्में समग्र आर्थिक लाभ के साथ सामाजिक सततता भी प्रदान कर सकें।
Published: May 5, 2026