जैक डॉर्सी के समर्थन से पुनः लॉन्च हुई 'डिवाइन' ऐप, मानव निर्मित कंटेंट अनिवार्य
ट्विटर के सह-संस्थापक जैक डॉर्सी ने शॉर्ट‑वीडियो प्लेटफ़ॉर्म डिवाइन के पुनः लॉन्च को स्क्रॉल किया है, जिसमें सभी प्रकाशित सामग्री को मानव द्वारा निर्मित होना अनिवार्य किया गया है। यह उपाय, जो मूल रूप से 2013‑14 में ‘वाइन’ नाम से लोकप्रिय हुआ था, अब भारतीय डिजिटल बाजार में नई प्रतिस्पर्धा के रूप में उभरा है।
डिवाइन, छह सेकंड के लूपिंग वीडियो प्रारूप को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि उसी समय टिकटॉक, इंस्टाग्राम रील्स और यू‑ट्यूब शॉर्ट्स जैसी AI‑संचालित प्लेटफ़ॉर्मों से भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। डॉर्सी ने कहा है कि मानव‑मूल्यांकन वाले कंटेंट से प्लेटफ़ॉर्म की गुणवत्ता और उपयोगकर्ता‑विश्वास में सुधार होगा, और विज्ञापनदाताओं को अधिक भरोसेमंद दर्शक वर्ग मिलेगा।
व्यापारिक दृष्टिकोण से देखिए तो डिवाइन की नई नीति का दोहरा प्रभाव हो सकता है: एक ओर, कंटेंट क्रिएटर्स को मौलिक रचनात्मकता में निवेश करने के लिये प्रेरित करेगी, जिससे भारतीय युवा उद्यमियों और फ्रीलांसरों के लिये अतिरिक्त आय के स्रोत खुल सकते हैं। दूसरी ओर, AI‑सहायता पर निर्भर छोटे‑स्तर के निर्माताओं के लिये यह प्रतिबंध उत्पादन लागत बढ़ा सकता है, जिससे बाजार में प्रवेश बाधित हो सकता है।
वर्तमान में भारत में डिजिटल विज्ञापन का आकार लगभग ₹12 हजार करोड़ तक पहुँच गया है। डिवाइन का विज्ञापन‑आधारित राजस्व मॉडल, यदि 5 % बाजार हिस्सेदारी हासिल कर लेता है, तो सौ अरब रुपये के निकट का संभावित टर्नओवर उत्पन्न कर सकता है। परन्तु यह अनुमान कई अनिश्चितताओं पर निर्भर करता है: प्लेटफ़ॉर्म की सामग्री मॉडरेशन क्षमता, डेटा‑सुरक्षा और भारत के डिजिटल‑मीडिया नियमन (आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम) के अनुपालन की स्थिति।
नियामकीय दृष्टिकोण से भारत ने हाल ही में AI‑जनित झूठी जानकारी और अनुचित सामग्री को रोकने के लिये कठोर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डिवाइन की “मानव‑केवल” नीति इन नियमों के अनुरूप लगती है, परन्तु यह भी प्रश्न उठाता है कि क्या प्लेटफ़ॉर्म अपर्याप्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस निगरानी के कारण संभावित हानिकारक सामग्री को छानने में सक्षम रहेगा। इस संदर्भ में, नियामकों को यह देखना होगा कि डिवाइन जैसी नई एंट्रीज को प्रतिस्पर्धा में समान शर्तें मिलें, ताकि मौजूदा बड़े खिलाड़ियों को अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ न मिले।
उपभोक्ता हित की दृष्टि से, मानव‑निर्मित कंटेंट पर ध्यान देना कंटेंट की विश्वसनीयता में वृद्धि कर सकता है, परन्तु इससे उपयोगकर्ता अनुभव में देरी और सामग्री की विविधता में कमी आ सकती है। यदि प्लेटफ़ॉर्म उपयोगकर्ता‑जनित डेटा और विज्ञापन राजस्व को पारदर्शी रूप से प्रकट नहीं करता, तो उपभोक्ता भरोसा घट सकता है और नियामक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ सकती है।
सारांश में, जैक डॉर्सी के समर्थन से डिवाइन की पुनः शुरुआत भारतीय शॉर्ट‑वीडियो बाजार में नई गतिशीलता लाएगी। इसकी मानव‑सृजन मॉडल संभावित रूप से रचनात्मक मूल्य को बढ़ा सकती है, परन्तु लागत‑बढ़ोतरी, नियामकीय अनुपालन और प्रतिस्पर्धात्मक संतुलन के प्रश्न अभी भी खुले हैं। बाजार सहभागियों को इस विकास को करीब से देखना होगा और संभावित जोखिम व अवसरों के साथ रणनीतिक योजना बनानी होगी।
Published: May 5, 2026