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Category: व्यापार

गुल्फ में अस्थिर विराम पर भी सोने की कीमत स्थिर, भारत की महंगाई चिंताएँ सुकून पाईं

अभी तक जारी अमेरिकी‑ईरानी शत्रुता‑शांति, जिसमें एक मालवाहक जहाज़ को लक्षित करने की खबर के बाद भी, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमत में स्थिरता बनी रही। पिछले सप्ताह सोने की कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी के बाद यह स्थिर रही, जिससे भारत में महंगाई से जुड़े चिंताओं में थोड़ी राहत मिली।

सोना भारतीय उपभोक्ताओं और निवेशकों के लिए महंगाई के विरुद्ध एक प्रमुख बचाव साधन है। घरेलू मांग मुख्यतः आयात के माध्यम से पूरी होती है; वर्तमान में आयात शुल्क (10% सीमा शुल्क + 28% GST) और कस्टम नियमों का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। जब वैश्विक बाजार में कीमतें ऊँची या अस्थिर रहती हैं, तो भारतीय रुपये में वही कीमतें बढ़ती हैं, जिससे आयात लागत, कर राजस्व और अंततः उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर दबाव बनता है।

हाल के अमेरिकी‑ईरानी हौसले के बाद, कई विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि संभावित संघर्ष से तेल कीमतों में उछाल आएगा और साथ ही सोने की कीमतें भी तेज़ी से बढ़ेंगी, जिससे भारत में महंगाई का जोखिम बढ़ेगा। हालांकि, दोनों पक्षों ने क्षणिक क्षमतावान मोर्चे पर शत्रुता को रोक लिया, और इस कारण सोने की कीमत में तीव्र गिरावट नहीं हुई। परिणामस्वरूप, RBI (भारतीय रिज़र्व बैंक) को मौद्रिक नीतियों के पुनर्मूल्यांकन में थोड़ी शांति मिली, क्योंकि सोने की कीमतों को महंगाई के प्रमुख संकेतक मानते हुए, उसकी अस्थिरता से नीतिगत दबाव अवश्य ही बढ़ता।

भविष्य में, यदि इस शांतिकाल में पुनः संकट उत्पन्न होता है, तो सोने की आयात लागत में अचानक बढ़ोतरी, कस्टम राजस्व में उछाल और उपभोक्ता स्तर पर उच्चतम कीमतें देखना संभव है। यह स्थिति भारतीय सरकार के मौजूदा आयात नीतियों—जैसे कि सोने पर कई बार लागू उच्च कस्टम शुल्क और बार-बार बदलते GST दरों—को फिर से जांचने की आवश्यकता ला सकती है। नियामकीय ढांचे के भीतर यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा शुल्क संरचनाएँ बाहरी शॉक प्रतिरोध के लिए पर्याप्त हैं या नहीं।

वर्तमान में, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की स्थिरता छोटे‑मध्यम अवधि में भारत के महंगाई लक्ष्य (4% ± 2%) को बहुत अधिक बाधित नहीं करेगी, परन्तु लंबी अवधि में भू‑राजनीतिक अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए, RBI को विदेशी विनिमय भंडार के प्रबंधन और प्रत्यक्ष बाजार हस्तक्षेप के उपकरणों को सक्रिय रखना आवश्यक है। साथ ही, उपभोक्ता हित में जागरूकता अभियान चलाकर अवांछित अति‑वित्तीय धीरज को रोका जा सकता है, जिससे सोने की आरएसएफ़ और बिंगो उत्पादों की कीमतों में अनावश्यक उछाल को कम किया जा सके।

संक्षेप में, गुल्फ में निरंतरित अस्थिर शांति ने सोने की कीमत में स्थिरता प्रदान की, जिससे भारतीय महंगाई के दबाव में अस्थायी राहत मिली। परन्तु यह भी स्पष्ट हुआ कि बाहरी भू‑राजनीतिक जोखिमों पर निर्भरता को ध्वस्त करने के लिए, नीति निर्माताओं को आयात शुल्क, नियामकीय पारदर्शिता और मौद्रिक लचीलापन जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक सुधार की आवश्यकता है।

Published: May 6, 2026