जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: व्यापार

गैप के सह-संस्थापक डोरिस फिशर का निधन, 16 अरब डॉलर के वैश्विक ब्रांड पर प्रभाव

अमेरिका के प्रमुख एप्पैरल रिटेलर गैग (Gap Inc.) की सह-संस्थापक डोरिस फिशर का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। 1969 में अपने पति डॉन फिशर के साथ सिंगापुरी में एक छोटा जीन्स‑स्टोर खोलने से लेकर आज के बहु‑बिलियन‑डॉलर ब्रांड तक का सफर न केवल फैशन उद्योग में बदलाव लाया, बल्कि वैश्विक वस्त्र उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर गहरा आर्थिक असर डाला है।

गैप ने 2025 तक लगभग 16 बिलियन डॉलर का वार्षिक राजस्व दर्ज किया, जिसमें एशिया‑प्रशांत क्षेत्र—विशेषकर भारत, चीन और वियतनाम—से आय का एक बड़ा हिस्सा आता है। भारत में गैप ने 2007 से कई बड़ी मॉल में अपने आउटलेट स्थापित किए हैं और स्थानीय कपड़ा सप्लायर्स के साथ दीर्घकालिक अनुबंध बनाए हैं। ये अनुबंध मिलियन‑लाखों रुपये के विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने के साथ‑साथ भारतीय वस्त्र निर्माताओं को प्रौद्योगिकी उन्नयन, सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों में सुधार करने के लिए प्रेरित करते हैं।

डोरिस फिशर के नेतृत्व में गैग ने आपूर्ति श्रृंखला में लागत‑प्रभावीता और विविधता को प्राथमिकता दी। हालांकि, इस मॉडल को कभी‑कभी श्रम अधिकारों और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। भारतीय नियामक संस्थाएँ, जैसे श्रम मंत्रालय और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, ने कई बार फैक्ट्री ऑडिट और स्थायी उत्पादन प्रक्रियाओं की माँग की है। इस संदर्भ में, गैग ने 2024 में ‘सस्टेनेबल फॅशन गाइडलाइन’ अपनाई, जिससे न केवल ब्रांड की कॉरपोरेट जवाबदेही बढ़ी, बल्कि स्थानीय आपूर्तिकर्ता भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन करने लगें।

रोजगार के दृष्टिकोण से गैप ने भारत में प्रत्यक्ष रूप से 3,500 से अधिक लोगों को काम पर रखा है, जबकि उसके सप्लायर्स के माध्यम से लाखों श्रमिक जुड़े हैं। इस रोजगार सृजन का सकारात्मक प्रभाव उपभोक्ता कीमतों में स्थिरता और स्थानीय आय में वृद्धि के रूप में परिलक्षित होता है। दूसरी ओर, उच्च स्टॉक‑ट्रेडिंग मूल्य और शेयरधारकों के लिए लाभप्रदता पर ज़ोर देने से कभी‑कभी स्थानीय छोटे व्यवसायों पर दबाव बढ़ता है।

डॉरिस फिशर के निधन के बाद, गैप के बोर्ड ने उनके व्यापारिक विज़न को ‘सतत विकास और उपभोक्ता-सुगम फैशन’ के रूप में जारी रखने का आश्वासन दिया। यह प्रतिबद्धता भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए एक संकेत देता है—कि विदेशी ब्रांडों के साथ सहयोग से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय मानकों का उन्नयन भी संभव है। भविष्य में नीति‑निर्माताओं को इस संतुलन को बनाए रखने हेतु श्रम कानूनों का सुदृढ़ीकरण और निर्यात‑उन्मुख उद्यमों को प्रोत्साहन देना आवश्यक रहेगा।

Published: May 5, 2026