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Category: व्यापार

गिग प्लेटफ़ॉर्मों में डायनेमिक वेतन पर प्रतिबंध की मांग: टीयूसी की नई चेतावनी

त्रुटिहीन अल्गोरिदम के आधार पर तय की जाने वाली ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ को गिग इकोनॉमी की प्रमुख कंपनियों, जैसे उबर, ओला, स्विगी और ज़ोमैटो पर लागू करने के विरोध में ट्रे्ड्स यूनियन कांग्रेस (टीयूसी) ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, इस मॉडल से कामगारों की आय अब समय, कौशल या प्रयास से असंबद्ध हो गई है, और वे खुद को ‘जुआ’ खेलने जैसा महसूस कर रहे हैं।

आर्थिक दृष्टि से यह प्रवृत्ति कई चुनौतियां उत्पन्न करती है। पहली, आय में अनियमितता से व्यक्तिगत वित्तीय नियोजन असंभव हो जाता है, जिससे बचत की दर घटती है और ऋण लेन‑देनों में बढ़ोतरी की सम्भावना रहती है। दूसरी, अस्थिर वेतन की वजह से श्रमिक वर्ग की खरीदी शक्ति कमजोर होती है, जिसका असर पूरे उपभोक्ता बाजार पर पड़ता है। तीसरी, कंपनियों के लिए अल्पकालिक लाभ को प्राथमिकता देने वाला यह मॉडल प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य निर्धारण को प्रोत्साहित करता है, जिससे उपभोक्ता को कम किराया मिल सकता है, लेकिन दीर्घकाल में सेवा की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में गिरावट का खतरा रहता है।

भारत में नियामकीय ढांचा अभी इस नई कार्यशैली के साथ तालमेल बिठाने में पिछड़ रहा है। मौजूदा श्रम कोड में ‘गिग वर्कर’ को स्पष्ट वर्गीकरण नहीं दिया गया है, जिससे नियोक्ता‑कर्मचारी संबंध में पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा कवरेज दोनों ही अधूरी रह जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल ही में ‘प्लेटफ़ॉर्म एग्रीमेंट’ मामलों में कई फैसले जारी किए हैं, लेकिन अल्गोरिदमिक वेतन पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई अभी तक नहीं की गई। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है कि यूरोपीय संघ ने गिग प्लेटफ़ॉर्मों को न्यूनतम मजदूर अधिकार देने के लिए कठोर दिशानिर्देश प्रस्तावित किए हैं, जबकि भारत में अभी ऐसी नीति का अभाव है।

टीयूसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘डायनेमिक वेतन’ को कानूनी तौर पर प्रतिबंधित करना आवश्यक है, ताकि गिग कामगारों को न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और सामाजिक लाभ मिलने की गारंटी बनी रहे। ऐसा कदम न केवल श्रमिकों की आय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि प्लेटफ़ॉर्म कंपनियों को पारदर्शी मूल्य निर्धारण के लिए मजबूर करेगा, जिससे उपभोक्ता को भी उचित गुणवत्ता‑मूल्य अनुपात मिलेगा।

निवेशकों और वित्तीय विश्लेषकों को इस प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए गिग कंपनियों की आय‑वृद्धि प्रक्षेपण को पुनः मूल्यांकन करना चाहिए। अल्गोरिदमिक पे से जुड़ी अनिश्चितता को घटाकर कंपनियों का जोखिम प्रीमियम कम हो सकता है, पर इसका मतलब यह भी है कि वे अपने लागत‑संरचना में सामाजिक सुरक्षा पर अधिक खर्च करेंगे, जिससे लाभ मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।

सरकार के लिए यह एक निर्णायक मोड़ है। यदि गिग कार्यबल को आत्मनिर्भर बनाते हुए नियामकीय सुरक्षा प्रदान की गई, तो श्रमिक वर्ग में रोजगार स्थिरता बढ़ेगी, जिससे कुल मिलाकर रोजगार‑आधारित आर्थिक वृद्धि में योगदान होगा। साथ ही, उपभोक्ता को स्थिर कीमतों और बेहतर सेवा मानकों का लाभ मिलेगा। इसलिए, ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ पर प्रतिबंध के साथ एक व्यापक गिग कार्य‑आधारित श्रम कोड का निर्माण तत्काल आवश्यक है।

Published: May 3, 2026