कबिनेट ने दो अर्धचालक प्लांटों को मंज़ूरी दी, निवेश 3,936 करोड़ रुपये, ISM के तहत कुल परियोजनाएँ 12
भारत के केंद्रीय कैबिनेट ने दो नई अर्धचालक उत्पादन इकाइयों के लिए कुल 3,936 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय से भारत सरकार के "इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन" (ISM) के तहत अब तक स्वीकृत कुल परियोजनाओं की संख्या 12 तक पहुँच गई है। दोनों इकाइयों के लिए फॉर्मेल निवेश आकर्षण, स्थानीय तकनीकी क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण और आयात‑आधारित निर्भरता को घटाने की नीति‑उद्देश्य स्पष्ट हैं।
प्रस्तावित प्लांटों का अनुमानित वार्षिक उत्पादन क्षमता 2‑3 मिलियन वेफ़र प्रति वर्ष है, जिससे लगभग 5,000 सीधी नौकरियों की सृष्टि होनी है। साथ ही एन्जीनियरिंग, अनुसंधान‑विकास और सप्लाई‑चेन के माध्यम से अप्रत्यक्ष कार्यस्थल भी बढ़ेंगे। अर्धचालक घटकों के घरेलू उपलब्धता में सुधार से स्मार्टफ़ोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और आयओटी उपकरणों की लागत घटाने की उम्मीद है, जिससे अंत‑उपभोक्ता को सीधा लाभ मिलेगा।
हालांकि, नीति‑निर्माताओं के इस कदम की प्रशंसा के साथ ही कुछ व्यावहारिक चुनौतियों पर भी सवाल उठते हैं। अर्धचालन उद्योग में उच्च पूँजी‑गहन बुनियादी ढाँचा, कुशल कार्यबल की कमी और पेटेंट‑आधारित प्रौद्योगिकी तक सीमित पहुँच जैसी बाधाएँ अभी भी मौजूद हैं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंज़ूरी और विदेशी निवेशकों के साथ तकनीकी साझेदारी को सुगम बनाने के लिए नियामकीय प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आवश्यक है।
इसी संदर्भ में, भारत के उत्पादन‑लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत दी जाने वाली कर छूट और सब्सिडी की शर्तें स्पष्ट नहीं हैं। यदि इन प्रोत्साहनों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया गया तो कंपनियों को लंबी निवेश-अवधि में वित्तीय दबाव झेलना पड़ेगा, जिससे परियोजना के समय‑सीमा में देरी या वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरण की संभावना बन सकती है।
अंत में, दो नई अर्धचालक इकाइयों की स्वीकृति भारत की सामरिक तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, परंतु इसे सफल बनाने के लिए नीति‑निर्धारण, नियामकीय ढील, उद्योग‑शिक्षा‑संवाद और वित्तीय समर्थन के बीच समन्वित एवं निरंतर प्रयास आवश्यक है। तभी यह पहल न केवल निर्यात क्षमता बढ़ाएगी, बल्कि घरेलू निर्माण‑खर्च घटाकर उपभोक्ता‑हित में भी साकार होगी।
Published: May 5, 2026