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Category: व्यापार

एडीबी ने 70 बिलियन डॉलर के एशिया कनेक्टिविटी योजना को लॉन्च किया: 2035 तक ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क में विस्तार

एशिया विकास बैंक (ADB) ने आज 70 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ एक बहु‑स्तरीय कनेक्टिविटी पहल की घोषणा की। इस पहल का लक्ष्य 2035 तक एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र में बिजली‑सप्लाई के विश्वसनीयता, नवीकरणीय ऊर्जा की भागीदारी और डिजिटल बुनियादी ढाँचा दोनों को तीव्र गति से बढ़ाना है। योजना में पाँच मुख्य स्तंभ शामिल हैं: ट्रांसमिशन ग्रिड का आधुनिकीकरण, अंतर‑क्षेत्रीय हाई‑स्पीड फाइबर‑ऑप्टिक नेटवर्क, सॉलर‑और विंड‑पावर परियोजनाओं का पैमाना, सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल का विस्तार तथा नियामक ढाँचे का सुदृढ़ीकरण।

आर्थिक प्रभाव की दृष्टि से यह योजना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त निजी निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद रखती है, जिससे निर्माण, संचालन और रख‑रखाव (O&M) चरणों में लगभग 9‑10 लाख रोजगार सृजन होगा। ऊर्जा क्षेत्र में ग्रिड क्षमताओं का 40% तक विस्तार, और डिजिटल क्षेत्र में इंटरनेट प्रवेश दर में 30 प्रतिशत बिंदु की वृद्धि के अनुमान एशिया के विकासशील देशों के जीडीपी को 2025‑2035 के दशकीय रूप में 2‑3 प्रतिशत तक बूस्ट कर सकते हैं।

जिला‑स्तरीय और सीमापार व्यापार को सुगम बनाने के लिए एशिया‑प्रशांत संधि (APFTA) के साथ समन्वयित इस पहल में भारत, इंडोनेशिया, फ़िलिपीन्स, वियतनाम और बांग्लादेश को प्रमुख लाभार्थी माना गया है। इन देशों के बीच वर्तमान में कई परियोजनाएँ प्रचलित हैं, जैसे कि भारत‑बांग्लादेश हाई‑स्पीड फाइबर कनेक्शन, इंडोनेशिया‑फ़िलिपीन्स ट्रांस‑ऑशन ऊर्जा ग्रिड, तथा दक्षिण‑पूर्व एशिया बहु‑देशीय सौर ऊर्जा हब। एडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, इन परियोजनाओं में 60‑70% फाइनेंस स्थानीय बैंकों और विकास संस्थानों के माध्यम से दिया जाएगा, जबकि शेष भाग अंतरराष्ट्रीय बैंकों एवं निजी इक्विटी फण्ड्स से पूँजी जुटाने की योजना है।

नीतिगत पहलुओं पर नजर डालते हुए, एडीबी ने नियामक सुधरने की दिशा में “कनेक्टिविटी नियामक फ़्रेमवर्क 2025‑2030” प्रस्तावित किया है। इस ढाँचे का मुख्य उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया को तेज करना, पारदर्शी टैरिफ़ निर्धारण, और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप डेटा‑प्राइवेसी एवं साइबर‑सुरक्षा नियम स्थापित करना है। हालांकि, इस चरण में कई देशों की मौजूदा नियामक सरंचनाएँ अभी भी जटिल और धीमी हैं, जिससे परियोजना अनुमोदन में देरी की संभावना बनी रहती है। विशेषज्ञों ने कहा कि बिना कड़ी निगरानी के निजी‑क्षेत्र की भागीदारी से मूल्य‑वर्धन की प्रक्रिया में कम लाभकारी टेंडर, उपभोक्ताओं के लिए उच्च शुल्क, तथा पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी का जोखिम बढ़ सकता है।

उपभोक्ता स्तर पर अपेक्षित लाभ स्पष्ट है। बेहतर ग्रिड इन्फ्रास्ट्रक्चर से ग्रामीण इलाकों में बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे कृषि‑उद्योग और छोटे‑मध्यम उद्यम (SME) की उत्पादन क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, हाई‑स्पीड इंटरनेट पहुँच के विस्तार से शैक्षिक सामग्री, टेली‑हेल्थ, और ई‑कॉमर्स सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी, जिससे डिजिटल डिवाइड घटेगी। परन्तु, मूल्य‑निर्धारण के संदर्भ में संभावित जोखिम भी हैं: यदि टैरिफ़ संरचना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं रहती, तो ग्राहक महंगे डेटा पैकेज और बिजली दरों का सामना कर सकते हैं। इस संदर्भ में उपभोक्ता संरक्षण एजेंसियों की सक्रिय भूमिका आवश्यक होगी।

वित्तीय दृष्टिकोण से, एडीबी की योजना के तहत जारी किए जाने वाले कनेक्टिविटी बांड (Green & Digital Infrastructure Bonds) को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों द्वारा आकर्षक माना गया है। बांडों की संभावित क्रेडिट रेटिंग AAA‑मानक तक पहुंच सकती है, जिससे नई पूँजी किफ़ायती दरों पर उपलब्ध होगी। परन्तु, दीर्घकालिक राजस्व मॉडल में अस्थिरता, विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा के प्रतिक्षिप्त उत्पादन में मौसमी उतार‑चढ़ाव, और डिजिटल ट्रैफ़िक के भविष्यवाणी‑संकट को ध्यान में रखकर जोखिम प्रबंधन कारगर होना चाहिए।

समग्र रूप में, 70 बिलियन डॉलर की कनेक्टिविटी योजना एशिया के आर्थिक समावेश, ऊर्जा सुरक्षा, और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए नियामकीय तेज़ी, पारदर्शी मूल्य‑निर्धारण, निजी‑क्षेत्र की जवाबदेही, तथा उपभोक्ता संरक्षण की ठोस व्यवस्था अनिवार्य होगी। इन शर्तों को पूरा करने पर ही एडीबी के इस बड़े निवेश से अपेक्षित सामाजिक‑आर्थिक लाभ वास्तविकता में परिवर्तित हो पाएँगे।

Published: May 4, 2026