उपयोग किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में तेज़ी, पारम्परिक पेट्रोल‑डिज़ल कारों से कुल खर्च में अंतर
पिछले 12 महीनों में भारत के सेकेंड‑हैंड कार बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री में लगभग 45 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज हुई है। टाटा नेक्सॉन EV, एमजी ज़ेडएस EV और ह्युंडाई कोना इलेक्ट्रिक जैसी किफ़ायती मॉडल्स का उपयोग‑युक्त बाजार में प्रवेश, इस गति का मुख्य कारण माना जा रहा है। इस प्रवृत्ति से न केवल प्रयुक्त‑कार डीलरों को नई आय का स्रोत मिला है, बल्कि उपभोक्ता वर्ग को भी इलेक्ट्रिक तकनीक के करीब लाने में मदद मिल रही है।
हालाँकि उपयोग किए गए EV की कीमतें नई कारों की तुलना में 30‑35 प्रतिशत कम मिलती हैं, लेकिन उनके मालिकाना खर्च में कुछ विशिष्ट अंतर उभरते हैं। बिजली की दरें पेट्रोल‑डिज़ल की कीमतों से काफी कम रहने के कारण चालित लागत में लगभग 60‑70 प्रतिशत बचत होती है। वहीं, इलेक्ट्रिक पावरट्रेन में कम चलने वाला भाग होने के कारण रखरखाव खर्च पर भी 40‑50 प्रतिशत कमी आती है। दूसरी ओर, बैटरी की निरंतर गिरावट, संभावित रिप्लेसमेंट लागत (₹1‑2 लाख) और उच्च बीमा प्रीमियम, जो बैटरी क्षति जोखिम को कवर करते हैं, कुल खर्च को फिर भी प्रभावित कर सकते हैं।
आर्थिक दृष्टिकोण से यह विकास दोहरे प्रभाव वाला है। पहली ओर, कम ईंधन एवं रखरखाव लागत के कारण कुल स्वामित्व लागत (TCO) में उल्लेखनीय गिरावट, जिससे मध्यम वर्ग के खरीदारों के लिए EV अधिक आकर्षक बन रहा है। दूसरी ओर, उपयोग‑युक्त EV का तेज़ी से अवमूल्यन, विशेषकर बैटरी स्वास्थ्य के स्पष्ट न होने पर, पुनर्रेज़े मूल्य (रेसेल वैल्यू) को दबा देता है। वित्तीय संस्थानों ने इस जोखिम को कम करने के लिए ऋण‑दरें बढ़ाई हैं, जिससे संभावित खरीदारों की क्रेडिट लागत में इजाफ़ा हो सकता है।
सरकारी नीतियों का प्रभाव यहाँ दोधारी तलवार साबित हो रहा है। फेम‑II (FAME‑II) योजना के तहत नई EV पर सबसिडी, कर में छूट तथा GST में 5 प्रतिशत की दर लागू है, जिससे नई कारों की कीमत घटती है और उपयोग‑युक्त कारों के प्रतिस्पर्धी लाभ को सीमित करती है। वहीं, उपयोग‑युक्त EV पर स्पष्ट नीतिगत ढांचा अभी तक नहीं बना है; बैटरी रीसाइक्लिंग, वारंटी मानक और चार्जिंग नेटवर्क की उपलब्धता को लेकर नियामक दिशा‑निर्देश अधूरा बना हुआ है। इस अस्पष्टता से उपभोक्ता भरोसे में कमी आ रही है और डीलर‑शोरूम को अतिरिक्त प्रमाणन खर्च उठाना पड़ रहा है।
उपभोक्ता स्तर पर उपयोग‑युक्त EV का प्रवेश कई सकारात्मक परिवर्तन लाता है: शुरुआती निवेश कम, प्रचलित ईंधन मूल्य अस्थिरता से बचाव, तथा शहरी क्षेत्रों में बढ़ते इलेक्ट्रिक चार्जिंग पॉइंट्स का लाभ। परन्तु खरीदारों को बैटरियों की वर्तमान स्वास्थ्य जांच, संभावित रिप्लेसमेंट लागत, तथा चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता को ध्यान में रखना आवश्यक है। बीमा कंपनियों ने अभी तक बैटरी‑सम्बंधी दावों को सही‑सही मापने के लिये मानकों का विकास नहीं किया है, जिससे प्रीमियम में असमानता बनी रहती है।
समग्र रूप में, भारतीय उपयोग‑युक्त EV बाजार का विस्तार देश की इलेक्ट्रिक संक्रमण नीति को तेज़ करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, बशर्ते नियामक फ्रेमवर्क स्पष्ट हो और उपभोक्ता जागरूकता बढ़े। बैटरी रीसाइक्लिंग, मानकीकृत वारंटी एवं वित्तीय संस्थानों के लिए जोखिम‑आधारित लोन‑मॉडल की आवश्यकता, इस बाजार को स्थायी बनाने के प्रमुख स्तंभ बनेंगे। केवल तभी इलेक्ट्रिक वाहनों की किफायती प्रवृत्ति व्यावहारिक आर्थिक लाभ में परिवर्तित होकर भारत के रोजगार, पर्यावरण तथा ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों को पूर्णतः साकार कर सकेगी।
Published: May 3, 2026