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Category: व्यापार

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उच्च पेट्रोल कीमतों से कम‑आय वाले अमेरिकियों पर बढ़ा बोझ

विष्वइक crude‑oil की कीमतों में लगभग 30 % की त्वरित बढ़ोतरी के साथ, अमेरिकी पेट्रोल (गैसोलीन) का औसत खुदरा मूल्य इस वर्ष के पहले तीन महीनों में $3.47 प्रति Gallon तक पहुंच गया। इस उछाल का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जो राष्ट्रीय औसत आय के 30 % से कम कमाते हैं। बैरन फेडरल डेटा के अनुसार, कम‑आय वाले गृहस्थों का परिवहन खर्च अब कुल घरेलू खर्च का लगभग 12 % बना है, जबकि मध्यम‑उच्च आय वर्ग इस हिस्से को लगभग 5 % पर सीमित रख पाते हैं।

बजट के इस दबाव के चलते कई कम‑आय वाले परिवार अपनी दैनिक यात्रा को सीमित कर रहे हैं—बच्चों को स्कूल ले जाने, किराने की खरीदारी या आकस्मिक डॉक्टर के पास जाने जैसी मुख्य आवश्यकताओं को छोड़ना पड़ा है। इसके अतिरिक्त, पुरानी और कम ईंधन‑कुशल कारें उपयोग में बनी रहती हैं, क्योंकि नई इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की उच्च प्रारंभिक लागत को वहन करना अधिकांश घरों के लिए संभव नहीं है।

बाजार में तेल प्रमुख कंपनियों की लाभप्रदता भी बढ़ी है। हेजिंग रणनीतियों और दीर्घकालिक अनुबंधों के कारण, एक्सॉनमोबिल, शेल और चेव्रोन जैसे नेशनल फर्मों ने 2025‑26 वित्तीय वर्ष में अपनी शुद्ध मार्जिन में लगभग 7 % की वृद्धि दर्ज की। आलोचकों का तर्क है कि इन कंपनियों ने कीमतों में तेजी का फायदा उठाते हुए बहु‑देशीय टैक्स संरचनाओं और सीमित मूल्य‑नियंत्रण तंत्रों के माध्यम से उपभोक्ता बोझ को असमान ढंग से धकेल दिया है।

नियामकीय दृष्टिकोण से, फेडरल एथलेटिक्स एण्ड एनवायरनमेंट एजेन्सी (EPA) ने 2025 में ईंधन‑आर्थिक मानकों को थोड़ा ढीला किया है, जिससे वाहन निर्माताओं को कम‑इंधन‑कुशल मॉडल पेश करने की अनुमति मिली। वहीँ, रणनीतिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) के तेल रिलीज़ केवल अस्थायी राहत प्रदान करने में सफल रहे हैं, क्योंकि मंगलवार को 30 मिलियन बैरल की रिहाई कुल बाज़ार आपूर्ति के 0.2 % से कम है। राज्य‑स्तर पर पम्प‑टैक्स में वृद्धि की संभावना भी बढ़ी है, जिससे स्थानीय स्तर पर कीमतें और बढ़ सकती हैं।

सरकारी एजेंसीयों ने EV खरीद के लिए टैक्स क्रेडिट और सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे में निवेश की घोषणा की है, परन्तु इन उपायों का प्रभाव कई महीने बाद ही महसूस किया जाएगा। इस बीच, प्रशासन के ऊर्जा सुरक्षा के दावों और वास्तविक उपभोक्ता राहत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। नीति‑निर्माताओं पर दबाव है कि वे त्वरित राहत के लिए प्रमुख तेल‑उत्पादकों के साथ अंतः‑स्ट्रेटेजिक समझौते पर विचार करें, साथ ही दीर्घकालिक तौर पर ईंधन‑कुशलता और सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने वाले उपायों को तेज़ी से लागू करें।

उच्च पेट्रोल कीमतें न केवल अमेरिकी उपभोक्ताओं को बल्कि वैश्विक तेल‑आधारित अर्थव्यवस्थाओं को भी प्रभावित करती हैं। भारत की आयात‑निर्भरता वाले कच्चे तेल की कीमतें अपनी ही गति से बढ़ रही हैं, जिससे भारतीय डिस्टिलरी सेक्टर में परिष्करण लागत में 5‑6 % की वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप, देश के पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों में भी ऊपर की ओर झुकाव देखा जा रहा है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के जीवनयापन खर्च पर दबाव बढ़ रहा है।

Published: May 7, 2026