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Category: व्यापार

ईरान‑इजराइल संघर्ष के जोखिम से एशिया‑पैसिफिक के बड़े बैंकों की आय पर दबाव, HSBC और वेस्टपैक सबसे अधिक प्रभावित

पर्वतीय एशिया‑पैसिफिक में प्रमुख बैंकों की आय अग्रिम अनुमान अब ईरान‑इजराइल संघर्ष के संभावित आर्थिक प्रभावों से धूमिल हो गई है। बहुराष्ट्रीय HSBC और ऑस्ट्रेलिया‑आधारित Westpac ने अपने जोखिम‑उद्घाटन को लेकर चेतावनी दी, जबकि सिंगापुर के कई बैंकों ने जोखिम प्रबंधन में अधिक सतर्कता दिखाई।

HSBC ने अपनी मध्य‑वर्षीन आय रिपोर्ट में विपरीत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल को कारण मानते हुए करज‑डिफ़ॉल्ट प्रावधान (ECL) में 30 % तक वृद्धि की घोषणा की है। मध्य‑पूर्व में कंपनी‑ग्राहक और तेल‑उत्पादन‑संबंधी ऋणों का बड़ा हिस्सा होने के कारण, यूक्रेन‑रूस के बाद अब ईरान‑इजराइल संघर्ष को सबसे बड़ा भू‑राजनीतिक जोखिम माना जा रहा है।

वेस्टपैक ने भी अपनी लाभ‑प्रक्षेपण को लगभग 15 % घटा दिया, मुख्यतः ऑस्ट्रेलिया‑एशिया व्यापार के भीतर मध्य‑पूर्व को पुनर्निर्देशित करने वाले अप्रत्याशित शिपिंग खर्च और रिवोल्विंग क्रेडिट सुविधाओं की लागत में वृद्धि के कारण। बैंकों ने इस अवधि में पूँजी पर्याप्तता (CAR) को समर्थन देने के लिए अतिरिक्त प्रावधान रखने का इरादा जताया है।

सिंगापुर के प्रमुख बैंकों, जैसे DBS और OCBC, ने तुलना में कम जोखिम‑उद्घाटन दिखाया। इन संस्थाओं ने अपने मध्य‑पूर्व संपर्क को सीमित करने और मौद्रिक जोखिम को हेज करने के लिए डेरिवेटिव साधनों का उपयोग किया, जिससे कुल प्रावधान में केवल 5‑7 % की हल्की बढ़ोतरी हुई। यह अंतर नियामकीय ढाँचे और जोखिम‑प्रबंधन रणनीतियों में अंतर को उजागर करता है।

भारतीय बाजार पर भी इन जोखिमों के परिलक्षित प्रभाव स्पष्ट हो रहे हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए ईरान के साथ व्यापार में अनिश्चितता की वजह से भुगतान प्रणाली में देरी और लेन‑देनों की लागत में बढ़ोतरी का खतरा है। उसी के साथ, भारतीय बैंकों को अंतरराष्ट्रीय डेब्ट‑इन्स्ट्रूमेंट्स में संभावित शृंखला टूटने का सामना करना पड़ सकता है, जिससे विदेशी निवेशकों की भरोसेमंदिता घट सकती है।

नियामक निकाय, जैसे ऑस्ट्रेलिया के प्रूडेंशियल रेगुलेशन अथॉरिटी (APRA) और यूके के फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी (FCA), ने बैंकों को भू‑राजनीतिक जोखिम को स्पष्ट रूप से प्रकट करने और पर्याप्त लिक्विडिटी बफ़र बनाए रखने का निर्देश दिया है। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अभी तक ऐसी स्पष्ट दिशानिर्देश जारी नहीं किए हैं, जिससे भारतीय बैंकों में जोखिम के आकलन के लिए मानक असमानता बनी हुई है।

इन विकासों से यह स्पष्ट हो रहा है कि बैंकों के लिए नीतिगत स्पष्टता और जोखिम‑प्रबंधन के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। जहाँ कुछ बैंकों ने सक्रिय रूप से जोखिम को हेज किया है, वहीं HSBC और Westpac जैसे संस्थान अभी भी अपने भू‑राजनीतिक जोखिम प्रोफ़ाइल को पुनःसंतुलित करने की प्रक्रिया में हैं। यह अंतर निवेशकों और उधारकर्ताओं दोनों के लिए स्पष्ट संकेत देता है कि नियामक ढाँचों की कड़ाई और कॉरपोरेट जवाबदेही सीधे वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करती है।

Published: May 4, 2026