अमेरिकी हार्मुज़ योजना से यूरोपीय गैस फ्यूचर में उतार-चढ़ाव, भारत के आयात और कीमतों पर असर की सम्भावना
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने इस सप्ताह घोषणा की कि अमेरिकी नौवहन दल कुछ तटस्थ जहाजों को परसियन गल्फ के बंद‑बांध स्ट्रीट ऑफ़ हार्मुज़ से बाहर निकालने में मदद करेगा। इस कदम ने मध्य‑पूर्वी शक्ति‑परिचालन में बदलाव का संकेत दिया, जिससे यूरोपीय प्राकृतिक गैस बाजार में अस्थिरता उत्पन्न हुई।
हार्मुज़ के निकट शिपिंग को सुरक्षित करने की अमेरिकी पहल ने यूरोपीय गैस फ्यूचर की कीमतों में दो‑तीन दिन में 3‑4 % की गिरावट‑बढ़ोतरी दर्ज कराई। निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि यदि शिपिंग रूट में फिर से प्रतिबंध या टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है, तो गैस आपूर्ति में व्यवधान का जोखिम बढ़ जाएगा।
वैश्विक स्तर पर यूरोपीय गैस बाजार का विकास भारतीय आयातकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी गैस की लगभग 60 % आवश्यकता समुद्री आयात पर निर्भर करता है, जिसमें मध्य‑पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और एशिया‑पैसिफिक प्राथमिक आपूर्तिकर्ता हैं। यूरोप में कीमतों में उतार‑चढ़ाव अक्सर LNG स्पॉट मार्केट पर प्रतिबिंबित होता है, जिससे भारत के दीर्घकालिक अनुबंधों के अलावा स्पॉट खरीद की लागत भी प्रभावित होती है।
वर्तमान में भारत के प्रमुख गैस आयातकों ने तुलनात्मक रूप से स्थिर मूल्य‑परिकल्पना अपनाई है, लेकिन यूरोपीय बाजार में उच्च अस्थिरता से स्पॉट LNG की कीमतें अस्थायी रूप से 10‑12 % तक बढ़ सकती हैं। यह वृद्धि उपभोक्ता स्तर पर गैस‑से‑बिजली और एलपीजी (एएलपीजी) की रीटेल कीमतों को ऊपर धकेल सकती है, विशेषकर गर्मियों के उच्च‑मांग अवधि में।
नियामकीय दृष्टिकोण से, भारतीय ऊर्जा मंत्रालय ने पहले ही रणनीतिक गैस भंडार (SGS) को बफ़र के रूप में उपयोग करने की योजना की घोषणा की थी। इस योजना के तहत, यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अचानक कीमत बढ़ती है, तो सरकार SGS से गैस रिहा कर उपभोक्ताओं पर बोझ कम कर सकती है। हालांकि, इस उपाय की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भंडारण क्षमता और त्वरित वितरण तंत्र कितनी तेज़ी से काम करता है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी हार्मुज़‑फोकस नीति दीर्घ‑कालिक जियो‑पॉलिटिकल जोखिम को कम नहीं करती, बल्कि शिपिंग रूट की अनिश्चितता को बढ़ाती है। इससे वैश्विक LNG ट्रेड में मूल्य‑प्रभावी जोखिम प्रीमियम बढ़ेगा, और भारतीय आयातकों को दीर्घकालिक मूल्य‑स्थिरता के लिए हेजिंग उपकरणों का उपयोग बढ़ाने की आवश्यकता होगी।
संक्षेप में, यूरोपीय गैस फ्यूचर की मौजूदा अस्थिरता अमेरिकी समुद्री मार्ग की नई नीति से उत्पन्न हुई है, जिससे वैश्विक LNG कीमतों में संभावित उछाल की संभावना बनी है। भारत को इस परिदृश्य में आपूर्ति‑सुरक्षा, मूल्य‑हैजिंग और रणनीतिक भंडारण के संयोजन से अपनी ऊर्जा‑आधार को स्थिर रखने की रणनीतिक आवश्यकता है।
Published: May 4, 2026