अमेरिका के किफायती घर निर्माताओं को पूँजी संकट, भारत में भी समान चुनौतियों का सामना
मिल्केन इंस्टीट्यूट ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में Pretium के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉन मुल्लेन ने 21st Century Road to Housing Act के प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस विधेयक से किफायती आवास के लिए फंडिंग में गिरावट आ रही है और निर्माण गति को तेज़ करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
Pretium, जो संयुक्त राज्य में सस्ते घर बनाने में प्रमुख है, ने बताया कि वित्तीय संस्थाएं अब अत्यधिक जोखिमभरे मानते हुए ठेकेदारों और डेवलपर्स को ऋण देने से हिचकिचा रही हैं। परिणामस्वरूप नई परियोजनाओं की योजना में देरी और मौजूदा प्रोजेक्ट्स के फंडिंग में अंतराल पैदा हुआ है। इस घटती पूँजी ने न केवल आवास की आपूर्ति पर असर डाला बल्कि निर्माण रोजगार के अवसरों में भी कमी लाई।
भारत में भी किफायती आवास के परिप्रेक्ष्य में समान संकेत दिखाई दे रहे हैं। बैंकों के कर्ज‑संकट के चलते रियल एस्टेट कंपनियों को मिल रही वित्तीय सुविधा घट रही है, जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) जैसी सरकारी पहलों से सस्ते घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। वित्तीय नियामकों की सख्त लेंड‑टू‑वैल्यू (LTV) मानदंड और नॉन‑पर्फॉर्मिंग एसेट्स (NPA) की चिंता के कारण कई बैंक नई आवास ऋण जारी करने में सावधान हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूँजी प्रवाह में सुधार नहीं हुआ तो भारत में किफायती आवास के लक्ष्य को प्राप्त करने में देरी होगी। इससे न केवल घरों की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी होगी, बल्कि निर्माण श्रमिकों की नौकरियों पर भी दबाव पड़ेगा। इस संदर्भ में, नियामकीय ढांचे में लचीलापन और सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देना आवश्यक माना गया है।
डॉन मुल्लेन ने कहा कि निर्माण कंपनियों को वित्तीय प्रतिबंधों के बावजूद अपने प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए नई फाइनेंसिंग मॉडल, जैसे कि इक्विटी‑जड़ित फंड या सस्ते बांड, अपनाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सरकार को मौजूदा नियमों में सुधार करके लोन‑टू‑वैल्यू अनुपात को सकारात्मक रूप में बदलना चाहिए, जिससे बाजार में भरोसा फिर से स्थापित हो सके।
भारत में भी समान उपाय अपनाने से किफायती आवास की आपूर्ति में तेजी लाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। यदि वित्तीय संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग बना रहे, तो निर्माण उद्योग को नई ऊर्जा मिल सकती है, जिससे न केवल घरों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि रोजगार सृजन और उपभोक्ता कल्याण भी सुदृढ़ होगा।
Published: May 5, 2026