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Category: व्यापार

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अमेरिका-ईरान शांति संकेत से सोना स्थिर, भारत में महंगाई का डर घटा

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की आशा ने अंतरराष्ट्रीय सोने के बाजार में तेज़ी दिखाई, जिससे सोने की कीमतों ने 31 मार्च के बाद से सबसे बड़ा दैनिक उछाल दर्ज किया। भारतीय निवेशकों ने इस गति को ध्यान में रखते हुए, सोने की कीमतों में स्थिरता देखी, जो कि हाल के महीनों में महंगाई के बारे में बढ़ती चिंताओं के खिलाफ एक सकारात्मक संकेत माना गया।

जॉर्जिया प्रीफिक्स के अनुसार, सोने की स्पॉट कीमत में 0.6 % की बढ़त हुई है, जो भारतीय गोल्ड बाजार में भी समान असर डाल रही है। भारत में सोने की कीमतें अक्सर मुद्रास्फीति के संकेतक के रूप में देखी जाती हैं; इस हालिया उछाल ने महंगाई के दांव में दबाव को कुछ हद तक कम किया है, क्योंकि सोने पर निर्भर भारतीय उपभोक्ता और निवेशक अब थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं।

शांति के संकेत से मध्य पूर्व में तेल कीमतों में गिरावट आई है। बर्मूडा में बेंज़िन की कीमतों में लगभग 4 % की गिरावट ने भारतीय आयात बिल पर सकारात्मक असर डाला है। तेल की कम कीमत से डॉलर के मुकाबले रूढ़िवादी रुपये का दबाव कम हुआ, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में रूढ़िवादी स्थिरता बनी रही। यह स्थिति भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मौद्रिक नीति की दिशा में भी मददगार है, क्योंकि कम तेल कीमतें सुदूरवर्ती महंगाई को नियंत्रित करने में सहायक होती हैं, जिससे RBI को दरों में तेज़ी से बदलाव न करने की सुविधा मिलती है।

वित्तीय नियामकों ने सोने के आयात पर लागू 10 % कस्टम ड्यूटी तथा 3 % जीएसटी को बरकरार रखा है, जिससे सरकारी राजस्व को स्थिरता मिली है। साथ ही, RBI का स्वर्ण मोनेटाइज़ेशन योजना, जो बैंकों को अतिरिक्त सोना जमा करने के लिए प्रोत्साहित करता है, इस ध्रुवीकरण के दौर में मौद्रिक सुदृढ़ीकरण का एक विकल्प बनकर उभरा है।

भले ही बाजार में सकारात्मक रुझान दिख रहा हो, विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय राजनैतिक तनावों में अचानक परिवर्तन सोने की कीमतों को फिर से उछाल सकता है। भारत के लिए मुख्य जोखिम अब भी आयातित सोने पर निर्भरता, अस्थिर विदेशी मुद्रा दरें, तथा मौद्रिक नीतियों की लचीलापन है। अतः उपभोक्ताओं और निवेशकों कोवित्तीय साक्षरता के साथ दीर्घकालिक पोर्टफोलियो रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

Published: May 7, 2026