अंतरराष्ट्रीय व्यापार में गिरावट से सोने‑चांदी की कीमतों में कमी, यूएस‑ईरान वार्ता पर बाजार की नज़र
आज अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतें 0.6 % और चांदी की कीमतें 1.2 % गिरावट दर्शा रही हैं। इस गिरावट का मुख्य कारण हल्के तेल मूल्यों और यूएस‑ईरान राजनयिक वार्ता की अनिश्चित प्रगति को माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर सोने के बीमा‑फ्यूचर की कीमतें अब 2,150 डॉलर प्रति औंस के निकट स्थिर हैं, जबकि भारत में स्थानीय बाजार में सोने की कीमत लगभग 63,200 रुपाई प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हो रही है। चांदी की कीमतें 23 डॉलर प्रति औंस से थोड़ा नीचे गिरते हुए भारतीय बाजार में 80 रुपाई प्रति ग्राम के आसपास दर्शाई गईं।
वित्तीय बाजारों के विशेषज्ञों का कहना है कि इस गिरावट से भारत के आयात बिल में उल्लेखनीय कमी आएगी। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सोना आयातकर्ता है, और लीडिंग आयातदाता के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को विदेशी विनिमय भंडार पर दबाव कम हो सकता है। वहीं, कम कीमतें घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोने‑ज्वेलरी की कीमतों में राहत प्रदान कर सकती हैं, जिससे मौसमी मांग में संभावित वृद्धि की उम्मीद है।
परंतु, कीमतों की इस अस्थायी गिरावट को दीर्घकालिक स्थिरता के रूप में नहीं देखना चाहिए। यूएस‑ईरान वार्ता के परिणाम पर निर्भरता के कारण, बाजार में दोहरावदार अस्थिरता का जोखिम बना रहता है। यदि वार्ता में प्रगति नहीं हुई या नयी तनावपूर्ण घटनाएँ उत्पन्न हुईं, तो सोने का सुरक्षित आश्रय के रूप में आकर्षण फिर से बढ़ सकता है, जिससे आयात कीमतें पूर्व स्तर पर लौट सकती हैं।
नीतिगत दृष्टिकोण से, RBI को मौद्रिक नीति के साथ सोने‑चांदी की बाजार गति पर भी सतर्क रहना चाहिए। मौजूदा रिवर्स रेपो दर और मुद्रा-स्फीति लक्ष्य को देखते हुए, RBI को सोने की आयात पर लागू कस्टम ड्यूटी को पुनः मूल्यांकन करने की जरूरत है, ताकि अस्थायी मूल्य‑घटाव का लाभ उठाते हुए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सके। भारतीय खनन विभाग की औद्योगिक नीति में गुनगुनी ढील से घरेलू सोने की खनन क्षमता को सुदृढ़ करना चाहिए, जो दीर्घकालिक स्वतंत्रता प्रदान करेगी।
ज्वेलरी उद्योग के प्रमुख खिलाड़ी इस कीमत‑घटाव से लाभ उठाने के लिए विशेष छूट और क़िस्त‑भुगतान योजना लॉन्च कर रहे हैं। हालांकि, उपभोक्ता चेतावनी भी जारी की गई है कि अल्पकालिक मूल्य‑त्रुटि को लेकर भारी खरीदारी से बचें, क्योंकि कीमतों की दिशा जल्द ही उलट सकती है।
संक्षेप में, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी और यूएस‑ईरान वार्ता की अनिश्चितता ने सोने‑चांदी के बाजार में अस्थायी गिरावट को जन्म दिया है, जिससे भारतीय आयात, उपभोक्ता खर्च और RBI की मौद्रिक रणनीति पर त्वरित प्रभाव पड़ा है। दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिये नीतिनिर्माताओं को वैश्विक भू‑राजनीतिक जोखिम, घरेलू उत्पादन क्षमता और उपभोक्ता सुरक्षा को समेकित रूप से विचार करना आवश्यक है।
Published: May 4, 2026