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UBS के सीईओ ने यूरोपीय आर्थिक गिरावट की चेतावनी, कहा 'बहु-नियमन से विकास पर दबाव'
स्विट्जरलैंड स्थित प्रमुख बैंक UBS के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सर्जियो एर्मोती ने हाल के इंटरव्यू में यूरोपीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी जारी की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यूरोपीय वित्तीय प्रणाली को ‘हर कोने में अत्यधिक नियमन’ का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बैंकों की पूँजी उपलब्धता, ऋण देने की क्षमता और अंततः आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
एर्मोती ने कहा कि नियामकीय ढाँचे में लगातार जोड़‑जोड़ की जा रही नई आवश्यकताएँ – जैसे बासेल III की सख़्त पूँजी मानदण्ड, मीफ़िड II के विस्तृत बाजार नियम, एंटी‑मनराना कानून और विस्तारित ESG प्रकटीकरण – न केवल बैंकों के संचालन को जटिल बना रही हैं, बल्कि जोखिम‑परिचालन लागत को भी बढ़ा रही हैं। इस परिदृश्य में यूरोप के छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए क्रेडिट उपलब्धता घटती देखी जा रही है, जिससे निवेश और रोजगार सृजन दोनों पर दबाव बनता है।
उन्हीं परिस्थितियों को ‘बहु‑नियमन’ के कारण यूरोपीय आर्थिक स्थिरता में गिरावट का प्रमुख कारण मानते हुए एर्मोती ने यह स्पष्ट किया कि नीति‑निर्माताओं को सिर्फ कागजी नियमों से संतुष्ट नहीं रहना चाहिए। ‘एक बहुत गहरा और दर्दनाक संकट ही सरकारों को इस दिशा में कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है,’ उन्होंने कहा, जो संकेत देता है कि मौजूदा नियामकीय माहौल में सुधार के लिये केवल नाटकीय आर्थिक गिरावट ही प्रेरक हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरोपीय संघ इस नियामकीय बोझ को हल्का नहीं करता तो बैंकिंग सेक्टर की लाभप्रदता में निरंतर गिरावट आ सकती है, जिससे शेयर बाजारों में नकारात्मक भाव बन सकता है। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं के लिए भी प्रतिकूल परिणाम निकलेगा; कम उपलब्ध क्रेडिट, उधार पर उच्च ब्याज दरें और पेशेवर ऋण के अवसरों में कमी से घर‑खरीद, व्यावसायिक विस्तार तथा व्यक्तिगत वित्तीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, नियामकों ने कहा कि कड़े नियम वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक हैं, विशेषकर वित्तीय संकट के दोहराव को रोकने के उद्देश्य से। लेकिन एर्मोती की बातों को सुनते हुए कई यूरोपीय नीति‑निर्माता अब अपने‑अपने देशों में नियामकीय संतुलन को पुनः परखने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। इस दिशा में संभावित सामरिक बदलावों में जोखिम‑आधारित नियामक दृष्टिकोण, नियामकीय अनुपालन लागत में कटौती और छोटे‑बड़े बैंकों के बीच समान प्रतिस्पर्धा को सुनिश्चित करना शामिल हो सकता है।
आगामी महीने में यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) और वित्त मंत्रालयों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा की आशा है। यदि नीति-निर्माताओं ने नियामकीय तंत्र को सुधारने के ठोस कदम नहीं उठाए, तो यूरोप के आर्थिक पुनरुत्थान की संभावनाएँ सीमित रह सकती हैं, और मौद्रिक एवं वित्तीय नीतियों के बीच तनाव बढ़ सकता है। इस परिदृश्य में, बैंकों, उद्योग और उपभोक्ता वर्ग के बीच उचित संतुलन बनाना सॉलिड आर्थिक विकास के लिये चुनौतीपूर्ण परंतु अनिवार्य कर्म बन गया है।
Published: May 8, 2026